बांदा (उप्र) | कोरोनावायरस का संक्रमण रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन से देशभर में मजदूर तबका ज्यादा मुसीबत में फंस गया है। काम बंद हो जाने के कारण घर लौट रहे मजदूरों के समूह में शामिल सात माह की एक गर्भवती महिला करीब 1,200 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर मंगलवार को अपने गृह जनपद बांदा आई है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के भदावल गांव की रहने वाली गुड़िया (24) अपने पति और दो साल के बच्चे के साथ गुजरात के सूरत महानगर की एक निजी कंपनी में मजदूरी कर रही थी। कोरोनावायरस को लेकर अचानक 25 मार्च को लॉकडाउन घोषित हो जाने के बाद इस दंपति को कंपनी मालिक ने निकाल दिया और यह दंपति वाहनों के बंद होने पर 26 मार्च को पैदल ही वहां से घर के लिए रेलवे पटरी के सहारे चल दिया था, जो पांचवें दिन मंगलवार को बांदा आ पाया है।
बांदा से सूरत की रेलमार्ग दूरी 1,256 किलोमीटर है और सड़क मार्ग की दूरी 1,066 किलोमीटर है।
गुड़िया ने बताया, “वह सात माह की गर्भवती है। लॉकडाउन के बाद मालिक ने कंपनी से निकाल दिया और पगार भी नहीं दिया।” उसने बताया कि कोई विकल्प न होने पर वह दो साल के बच्चे को गोद में लेकर पति के साथ रेल पटरी के सहारे ही पैदल चल पड़ी थी। भूखे-प्यासे दिन-रात चलने के बाद आज (मंगलवार को) हम बांदा आ पाए हैं।”
गुड़िया ने बताया कि रास्ते में गांव तो कई मिले, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। लगातार पैदल चलने से कई बार उसकी तबीयत भी खराब हुई।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “सूरत से पैदल चलकर बांदा आए दंपति की चिकित्सीय जांच की जा रही है, उन्हें 14 दिन तक क्वारंटाइन (अलग-थलग) रखने के बाद घर जाने की इजाजत दी जाएगी।”
–आईएएनएस

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