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Team Janmat Samachar

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बेंगलुरु| भाजपा के वरिष्ठ नेता बसवराज बोम्मई को बुधवार को राजभवन के ग्लास हाउस में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल...

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बेंगलुरु| कर्नाटक में मंगलवार को रोमांचक टी-20 मैच जैसा माहौल है, क्योंकि यहां बेंगलुरु में विधायक दल की बैठक के...

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बेंगलुरु| कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के चयन की निगरानी के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और...

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बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)| निषाद पार्टी के राज्य महासचिव और 2018 बुलंदशहर हिंसा के मुख्य आरोपियों में से एक शिखर अग्रवाल...

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दिल्ली: शिरोमणी अकाली दल ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर तीनों खेती कानूनों को निरस्त करने की मांग पर चर्चा करने के लिए केंद्र पर दबाव डालने की अपील की। छह अन्य पार्टियों के साथ शिरोमणी अकाली दल ने भी राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे उन्हे संसद में एनडीए सरकार के अड़ियल रवैये के बारे में उन्हे अवगत कराने के लिए समय दिया जाए, जो तीनों खेती कानूनों पर सभी चर्चाओं को होने नही दे रही है। इस पत्र पर उनकी पार्टी की ओर से बहुजन समाज पार्टी(बसपा), राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), सीपीआई-एम, सीपीआई, आरएलपी तथा जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधियों के अलावा शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने हस्ताक्षर किए हैं, साथ ही इसमें पेगासेस स्पायवेयर मामले में जांच की जरूरत पर चर्चा की मांग की है। पूर्व मंत्री सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को जानकारी दी कि वे खेती संबधी काले कानूनों को रदद करने पर चर्चा की मांग को लेकर स्थगन की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन सरकार इस संवेदनशील मुददे पर चर्चा की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। पत्र में कहा गया है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन  के दौरान हुई मानवीय त्रासदी जिसमें 550 से अधिकों को जानें गंवानी पड़ी है। ‘‘खेती क्षेत्र को कारपोरेटस को सौंपने के उददेश्य से बनाए गए तीनों काले कानूनों के कारण लाखों लोगों की आजीविका खतरे में हैं, लेकिन एनडीए सरकार इस मामले में लापरवाही दिखा रही है। हम आपसे अपील करते हैं कि केंद्र सरकार को तीनों कानूनों को निरस्त करने का निर्देश दिया जाए और फिर किसानों के साथ बातचीत की जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के तरीकों और साधनों पर चर्चा की जा सके’’। पत्र में कहा गया है कि  एनडीए सरकार के ज्ञात विरोधियों के अलावा राजनेताओं , पत्रकारों और...