नई दिल्ली, अप्रैल 9 आईएएनएस। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की बेटी आरुषि निशंक ने कोरोनावायरस की वजह से लागू किए गए लॉकडाउन का सदुपयोग करते हुए घर में ही खादी के मास्क बनाए और उन्हें कर्मचारियों में बांट दिया। आरुषि निशंक लॉकडाउन के दौरान किस तरह से व़क्त गुजार रही हैं, ये जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री निशंक ने कहा, “मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई कि मेरी बेटी आरुषि घर पर स्वयं खादी के मास्क बनाकर अपने स्टाफ के कर्मचारियों को वितरित कर रही है और उनको कोरोना वायरस से बचने के लिए सजग भी कर रही है।”
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा सार्स-कोवि-2 कोरोना वायरस से जुड़ी एक नियमावली में कहा गया है कि देश की अगर 50 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो सिर्फ 50 प्रतिशत आबादी को ही कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। यदि 80 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो इस महामारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा सकती है।
सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता का कहना है कि मास्क की कमी को देखते हुए इस नियमावली में घर पर मास्क बनाने पर जोर दिया गया है। यह पहल मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जो मास्क पहनना चाहते हैं, लेकिन उनके पास इन मास्क तक पहुंच नहीं है। ऐसे में घर पर बनाए हुए मास्क उपयोगी हो सकते हैं। इनकी खूबी यह है कि इन्हें धोकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
घर में मास्क बनाकर बांटने वाली आरुषि निशंक प्रख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना, पर्यावरणविद्, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
आरुषि ने गंगा नदी के धरती पर आने की कहानी पर आधारित ‘गंगा अवतरण’ एवं सूफियाना शास्त्रीय कथक नृत्य ‘सजदा’ जैसी रचनाओं की कोरियोग्राफी की है। आरुषि को उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार भी मिला है। आरुषि ने साल 2018 में अपनी पहली क्षेत्रीय फिल्म ‘मेजर निराला’ का निर्माण किया जो उनके पिता रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के लिखे उपन्यास पर आधारित है।
–आईएएनएस

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