आबिद अली ,
” पैसा यह पैसा ,पैसा है यह कैसा नहीं कोई ऐसा ,जैसा यह पैसा की हो मुसीबत ना हो मुसीबत “,यह गाना तो आपने सुना ही होगा ,यही हाल आजकल भारत में देखा जा सकता है ।
बेबेईमान व्यापारी 2,000 रुपये देकर गरीब किसानों के खातों में काला धन छिपाने की जगह तलाश रहे हैं । अपना काल धन गरीब परिवार, जिनमें से ज्यादातर किसान हैं उनके अकाउंट में डलवा रहे है और इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। व्यापारी इन गरीब परिवारों के बैंक खातों का उपयोग कर रहे हैं नकदी की भारी रकम जमा करने के लिए।
एक अन्य ग्रामीण ने स्वीकार है की जोभी गलत पैसा है यह लोग हमारे अकाउंट में डलवा देते हैं और हमें लालच देते हैं और हमारे पास खाने को पैसा नहीं है इसलिए मजबूरन हमें करना पढता है ।

“मैं एक भिखारी हूँ और यह मैं पहली बार इस बैंक में आ रहा हूँ। मुझे कुछ भी पता नहीं है … की कैसे पैसे निकालते हैं ,” उसने दावा किया है।

और भी हैं
यूपीएससी सीएसई 2025 का रिजल्ट जारी, अनुज अग्निहोत्री बने ऑल इंडिया टॉपर
दिल्ली में 25 से 27 फरवरी तक होगा “विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत” के लिए पूसा कृषि विज्ञान मेला
प्रधानमंत्री मोदी के विज़न के तहत दिल्ली में होने वाले “India AI Impact समिट 2026” के लिए परिषद द्वारा की गई तैयारियों की ज़मीनी समीक्षा: चहल