नई दिल्ली: डॉ.भीमराव अम्बेडकर की 131 वीं जयंती के अवसर पर भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने वर्ष –2022 के डॉ.अम्बेडकर नेशनल अवार्ड की घोषणा की है । अकादमी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में डॉ. हंसराज सुमन को वर्ष –2022 का डॉ. अम्बेडकर नेशनल अवार्ड दिए जाने की घोषणा की है । यह अवार्ड उन्हें साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में 11दिसंबर –2022 को नई दिल्ली में दिया जाएगा। यह अवार्ड समाज में अत्यंत पिछड़े , दलित समुदाय के उनके अधिकारों को दिलाने तथा उनको राजनैतिक , आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास करने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों को दिया जाता है । बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा भारत के बहुजनों के लिए देखें गए सपनों की नक्शे कदम पर चलते हुए समाज में कुछ महत्वपूर्ण व्यक्ति इन प्रयासों में लगे हुए है जिनमें डॉ. हंसराज सुमन भी एक महत्वपूर्ण नाम है ।
डॉ. हंसराज सुमन दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध श्री अरबिंदो कॉलेज में हिंदी साहित्य तथा मीडिया के एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है । आप की टीचर विंग के अध्यक्ष व ऑल इंडिया यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजिज एससी/एसटी ओबीसी टीचर्स एसोसिएशन के भी नेशनल चेयरमैन है ।ये पांच साल नॉन कॉलेजिएट सेंटर के प्रभारी रहे है । वर्ष – 2015–2017 और 2017 –2019 तक दिल्ली विश्वविद्यालय की सर्वोच्च संस्था एकेडेमिक काउंसिल में सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा ये दिल्ली विश्वविद्यालय की अनेक कमेटियों में रहकर डॉ. सुमन ने अपने दायित्व का निर्वाह किया है–एडमिशन कमेटी, अपॉइंटमेंट्स और प्रमोशन कमेटी, मेडिकल कमेटी, फंक्शन कमेटी, सलेब्स कमेटी के अलावा डॉ. सुमन डीयू की टास्क फोर्स कमेटी के सदस्य रहे है । इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक सम्मान व अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है । इन्हें दिल्ली सरकार का डॉक्टर अम्बेडकर अवार्ड के अलावा लगभग 100 संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है । इसके अलावा डॉ. सुमन ने 10 पुस्तकों का सम्पादन तथा 100 से अधिक विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लेख प्रकाशित हो चुके है। साथ ही इन्होंने न्यू मीडिया विषय पर पीएचडी की है ।
डॉ. हंसराज सुमन ने डॉ. अम्बेडकर नेशनल अवार्ड मिलने की घोषणा पर अपने संबोधन में कहा कि वे मानते है कि आने वाला समय चुनौतियों से भरा है किंतु दलितों का समय है और मुख्यधारा के लोगों द्वारा उन्हें अपनाएं जाने का भी समय है । उन्होंने कहा कि आज हम देखते है कि बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी बाबा साहेब डॉ.अम्बेडकर के विचार और उनके द्वारा सुझाएं गए कानूनों की राह पर चलते हुए यह समाज आगे अवश्य बढ़ा है और दलितों की स्थिति में आर्थिक रूप से ,शैक्षणिक रूप से तथा राजनैतिक रूप से बेहतर हुई हैकिंतु मानसिक स्तर पर अभी यह होना बाकी है । उन्होंने बताया कि आज दलितों के प्रति लोगों के दृष्टिकोण तथा व्यवहार में परिवर्तन आया है और दलितों पर होते आए अत्याचारों और शोषण जिसमें अश्पृश्यता या उनके प्रति लोगों की हींन भावना में परिवर्तन देखा जा सकता है किंतु अभी भी शोषण ,अत्याचार हो रहे है लेकिन अब उनके रूप बदल गए है। जिसे पूरी तरह से खत्म किए जाने की आवश्यकता है ।

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