नई दिल्ली। हुनर को पढ़ाई जैसी अहमियत मिलेगी। इसके लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूलों की पढ़ाई को रोजगार से जोड़ने के विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि स्कूल से निकलने के बाद उच्च शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और नौकरी की दुनिया में भी आसानी से आगे बढ़ सकें।
यह आयोजन सोमवार 26 अक्टूबर व 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचे के जरिए छात्रों के कौशल को शिक्षा व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर मान्यता देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद है कि छात्रों की सीखने की प्रक्रिया केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न रहे, बल्कि उनके व्यावहारिक ज्ञान और हुनर को भी महत्व मिले। इसके साथ ही स्कूलों में कौशल आधारित शिक्षा को सामान्य पढ़ाई का हिस्सा बनाने के तरीकों पर चर्चा हो रही है। इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही कामकाज की दुनिया की जरूरतों को समझने और भविष्य के लिए जरूरी क्षमताएं विकसित करने का अवसर मिल सकेगा।
‘स्कूल से कामकाजी दुनिया तक की राह आसान बनाना’ विषय पर आयोजित इस चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन में स्कूलों के प्रमुख, शिक्षक, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विद्यालय संगठनों के सहयोग से यह आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हो रही है कि बदलती जरूरतों के हिसाब से छात्रों को कैसे तैयार किया जाए।
स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी के अनिल कुमार और सीबीएसई के अध्यक्ष डॉ. मंदीप भंडारी भी सम्मेलन में मौजूद रहे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए टी के अनिल कुमार ने चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने की बात कही। इनमें तकनीक, डिजिटल सुरक्षा और कौशल-डिजाइन, रचनात्मकता और नए प्रयोग शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर कौशल को मान्यता देना तथा सभी छात्रों के लिए समान अवसरों के साथ करियर मार्गदर्शन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूल की पढ़ाई, उच्च शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। इससे छात्रों को अपने भविष्य के बारे में सोच-समझकर फैसले लेने में मदद मिलेगी। वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकेंगे। समाज में योगदान दे सकेंगे और सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन में शिक्षा के नए तरीकों, मूल्यांकन की बदलती व्यवस्था और पढ़ाई में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।
विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि शिक्षण को किस तरह अधिक उपयोगी बनाया जाए, ताकि छात्र बदलते रोजगार क्षेत्र की चुनौतियों का सामना कर सकें। सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के शिक्षक और शिक्षाविद अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं। वे कौशल आधारित शिक्षा से जुड़ी सफल पहलों पर आधारित शोध पत्र और पोस्टर प्रस्तुत कर रहे हैं। इनके जरिए दूसरे स्कूलों को भी उपयोगी तरीके अपनाने और अपने यहां शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के अवसर मिलेंगे।
यह सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उस सोच से जुड़ा है, जिसमें शिक्षा की विभिन्न धाराओं के बीच दूरी कम करने और छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया है। सम्मेलन में स्कूलों, शिक्षा विशेषज्ञों और उद्योग जगत के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे छात्रों को सही मार्गदर्शन देने और शिक्षा से रोजगार तक के सफर को अधिक सहज बनाने के लिए नए विचारों और व्यावहारिक तरीकों पर काम करने में मदद मिलेगी।
–आईएएनएस

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