नई दिल्ली: शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, दिल्ली सरकार ने आज दिल्ली एआई ग्राइंड (Delhi AI Grind) का शुभारंभ किया यह एक ऐतिहासिक, शहर-स्तरीय पहल है, जिसका उद्देश्य छात्रों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता-प्रधान भविष्य के लिए तैयार करना है। भारत के पहले सिटी-सेंट्रिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं इनोवेशन मूवमेंट के रूप में स्थापित यह अभियान 1,000+ स्कूलों, कॉलेजों, आईटीआई और विश्वविद्यालयों के माध्यम से 5 लाख से अधिक शिक्षार्थियों तक पहुँचेगा, जिससे दिल्ली की युवा पीढ़ी में व्यापक एआई क्षमता का निर्माण होगा।
इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा की हमें प्रसन्नता है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी राष्ट्र को आगे ले जाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक को निरंतर बढ़ावा देते रहते हैं। इसी कारण जब केंद्र सरकार ने निर्णय लिया कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में निर्णायक कदम उठाना चाहिए, तो दिल्ली ने सबसे पहले आगे बढ़ने का निश्चय किया। राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते, दिल्ली को नेतृत्व करते हुए यह दिखाना है कि तकनीक हर बच्चे, हर कक्षा और हर समुदाय को कैसे सशक्त बना सकती है।

कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने बताया की यह पहल भारत के एआई दशक को ध्यान में रखते हुए युवाओं को संरचित इनोवेशन, समस्या-समाधान और जिम्मेदार तकनीक-उपयोग की दिशा में प्रशिक्षित करेगी। डिजाइन थिंकिंग, प्रोटोटाइप निर्माण, सेक्टर-आधारित चुनौतियाँ और वास्तविक जीवन में उपयोग जैसे तत्वों के माध्यम से दिल्ली के शिक्षा संस्थानों को सक्रिय इनोवेशन लैब्स में परिवर्तित किया जाएगा। छात्र नागरिक एवं औद्योगिक चुनौतियों की पहचान कर सरकार एवं उद्योग जगत के साथ मिलकर व्यावहारिक समाधान विकसित करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया की अगले चार महीनों में दिल्ली एआई ग्राइंड के अंतर्गत 5,000 शिक्षकों को प्रमाणित एआई मेंटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, 1,000 छात्र- नेतृत्व प्रोटोटाइप विकसित किए जाएंगे साथ ही 50 एआई यूथ एंबेसडर चुने जाएंगे और दिल्ली के युवाओं द्वारा विकसित विचारों पर आधारित एक नेशनल इनोवेशन कंपेंडियम प्रकाशित किया जाएगा

यह पहल स्कूल, कॉलेज और ओपन श्रेणियों में 10 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं को दस प्रमुख क्षेत्रों—परिवहन, स्वास्थ्य, खाद्य प्रणाली, पर्यटन, सुशासन, ऊर्जा, डिजिटल शिक्षा, जलवायु एवं पर्यावरण, जल एवं कचरा प्रबंधन, तथा सार्वजनिक सेवाएँ में भागीदारी का अवसर देती है।
श्री सूद ने आगे बताया की दस-स्टेशन इनोवेशन मॉडल पर आधारित यह कार्यक्रम केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सतत वार्षिक आंदोलन है जिसमें जागरूकता, ऑनबोर्डिंग, जिलेवार राउंड, सिटी शोकेस, पायलट डिप्लॉयमेंट, तथा यूथ लीडरशिप सहभागिता जैसे चरण शामिल हैं, जिससे छात्र-आइडिया वास्तविक क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ सकें।
श्री सूद ने यह भी कहा की मजबूत शैक्षणिक तंत्र, डिजिटल गवर्नेंस क्षमता और जीवंत इनोवेशन पारिस्थितिकी तंत्र के साथ दिल्ली को एआई-आधारित शिक्षा सुधारों के लिए भारत की राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ विकसित ढाँचे और मॉडल अन्य राज्यों में भी लागू किए जा सकेंगे।

शिक्षा के अतिरिक्त दिल्ली एआई ग्राइंड नागरिक भागीदारी, युवा नेतृत्व और जिम्मेदार तकनीक उपयोग को भी विकसित भारत 2047 की दृष्टि से प्रोत्साहित करता है।
श्री सूद ने यह भी बताया की हमारे बच्चों को सिर्फ एआई चलाना नहीं, बल्कि एआई को दिशा देना सीखना चाहिए। वे केवल उपभोक्ता न बनें, बल्कि निर्माता बनें—ऐसे निर्माता जो पक्षपात को देख सकें, उसे सुधार सकें और तकनीक का उपयोग जीवन सुधारने के लिए कर सकें।

इस अवसर पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, इसरो अंतरिक्ष यात्री ने कहा की जब मैं यहाँ आया, तो मुझे नहीं पता था कि यह कार्यक्रम किस विषय पर है। लेकिन जब मैंने शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ नेतृत्व को यहाँ उपस्थित देखा, तब स्पष्ट हो गया कि हमारा नेतृत्व किस दिशा में ध्यान केंद्रित कर रहा है। यही वे क्षेत्र हैं जिन्हें हमें प्राथमिकता देनी चाहिए, और ऐसे प्रयास हमें विकसित भारत 2047 के सपने के करीब ले जाएँगे।
कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शैक्षणिक नेतृत्व, उद्योग साझेदार तथा छात्रों ने भाग लिया। इस अवसर पर दिल्ली एआई ग्राइंड का ब्रोशर भी जारी किया गया, स्कूल बच्चों द्वारा विशेष जिंगल प्रस्तुत किया गया, सीएम श्री स्कूलों के छात्रों द्वारा पेपर प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए गए, आधिकारिक टीज़र लॉन्च किया गया, तथा inovation Bus on Wheels को भी रवाना किया गया, जो इस अभियान को शहर के प्रत्येक कोने तक ले जाएगी।

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