इंद्र वशिष्ठ
महल के शिखर पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता। आचार्य चाणक्य की यह बात कलेक्टर /डीएम शैलेश कुमार यादव ने अपनी करतूत से चरितार्थ कर दी है।
वर्दी वाला गुंंडा सब ने बहुत सुना देखा है। आईएसआई के पाले आतंकी भी देखेंं हैं। लेकिन आईएएस वाला गुंंडा कलेक्टर शायद इस तरह पहली बार देखा जा रहा है।
त्रिपुरा में एक विवाह समारोह में कलेक्टर द्वारा की गई गुंडागर्दी का वीडियो पूरी दुनिया देख रही है। दूल्हे और मेहमानों के साथ बदसलूकी, मारपीट और महिलाओं तक से दुर्व्यवहार कर इस कलेक्टर ने अपने पद को तो कलंकित किया ही अपने संस्कारों का भी परिचय दिया है। पुजारी को पीट देने से भी यह कलेक्टर श्रेष्ठ नहीं हो जाता।
देश में न्याय, कानून का राज या लोकतंत्र अगर हैं तो सप्रीम कोर्ट/ हाईकोर्ट को गुंडों की तरह अपराध करने वाले इस कलेक्टर को जेल भेजना चाहिए। जिससे नागरिकों का भरोसा न्याय व्यवस्था में बने।
पद की ताकत के नशे में चूर इस कलेक्टर ने पुलिसवालों तक को गालियां दी उन्हें धकिया कर धमकाया।
कलेक्टर अपनी हद भूल गया-
एक महिला ने शादी के लिए ली गई अनुमति का कागज दिखाया तो कलेक्टर ने उस कागज को फाड़ कर उड़ा दिया। महिलाओं के प्रति एक कलेक्टर का ऐसा व्यवहार शर्मनाक हैं।
कलेक्टर ने कहा कि गांवों वालों और अनपढ़ जैसी बातें मत करो धारा 144 को पढ़ो। कलेक्टर का यह कहना गांवों वालों और अनपढ़ो का अपमान तो है ही इससे कलेक्टर की मानसिकता का पता चलता है। कलेक्टर बन कर अपना अतीत और औकात भूल जाने वाले इस अफसर ने ऐसी हरकत की जैसे वह विलायत में राजमहल में जन्मा है। और उसके सामने मौजूद लोग गुलाम हैं। पता चला कि यह उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर के किसी गांव का ही पला बढ़ा हुआ है। एमबीबीएस और एमडी डाक्टर बनने के बाद यह आईएएस बना। इसके बाप दादा भी तो गांव के ही होंगे और वह अनपढ़ भी हो सकते हैं।
कोरोना योद्धा डॉक्टर से बदसलूकी-
कलेक्टर के ऐसे व्यवहार का विरोध करते हुए एक व्यक्ति ने कहा मैं सर्जन हूं आप इस तरीक़े से बात मत करिए। यह सुनते ही कलेक्टर साहब ने तमतमा कर पुलिस से कहा कि सरकारी अफसर के कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में सर्जन को गिरफ्तार कर लो। इससे पता चलता है कि गलत बात का विरोध करने पर कलेक्टर के पद बैठा व्यक्ति भी सभ्य लोगों को कैसे झूठे मामले में फंसा देता है। एक ओर डाक्टर को कोरोना योद्धा कहा जा रहा हैं दूसरी कलेक्टर द्वारा ऐसा करना शर्मनाक,अपराध और गैरकानूनी है।
कलेक्टर ने कानून की धज्जियां उड़ाई-
कलेक्टरी के नशे में वह यह भूल गए कि धारा 144 लागू होने पर मजमा लगाने वालों को पहले धारा 144 लगी होने की सूचना दी जाती और उन्हें वहां से चले जाने को कहा जाता है। इसके बाद ही लोगों को हटाने या गिरफ्तार करने की प्रक्रिया अपनाई जाती। लेकिन इस कलेक्टर ने ऐसी किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
कलेक्टर ने अपराध किया-
कोरोना नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान या एफआईआर / गिरफ्तार किए जाने का प्रावधान है। लेकिन किसी के साथ बदतमीजी और मारपीट करने की इजाज़त तो कानून किसी को भी नहीं देता। किसी की पिटाई करना और बदसलूकी करना साफ तौर अपराध का मामला है। अगर कोई आईएएस अफसर यह अपराध करें तो बहुत ही शर्मनाक है।
आईएएस को संविधान और कानून तो मालूम ही होता है। इसके बावजूद जानबूझ कलेक्टर ने जो अपराध किया है वह अक्ष्मय है। कलेक्टर को ऐसी सजा दी जाने चाहिए जिससे आगे इस तरह को निरंकुश न हो।
नेताओं के सामने फूंक निकल जाती है-
आम लोगों पर इस तरह ताकत दिखाने वाले बहादुर आईएएस या पुलिस अफसर को उस समय सांप सूंघ जाता है जब सत्ता धारी नेता उनके सामने ही नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं।
आईएएस अफसर यह भूल गया कि सरकार ने जनता की सेवा के लिए उसे नौकरी दी हैं और जनता के टैक्स पैसे से उसे वेतन मिलता है। इस आईएएस को तो नौकरी भी शायद संविधान की कृपा यानी आरक्षण के कारण ही मिली होगी।
आईएएस,आईपीएस सबकी जाति एक “राज पूत”-
सच्चाई यह है कि चाहे किसी भी जाति का व्यक्ति हो आईएएस और आईपीएस बनने के बाद ज्यादातर का दिमाग पद, ताकत के नशे में इतना खराब हो जाता है कि वह खुद को सेवक की बजाए राजा/ मालिक और लोगों को गुलाम शूद्र प्रजा मान कर व्यवहार करते हैं। इन सबकी एक ही जाति राज पूत हो जाती है राज पूत मतलब जिसका राज/सत्ता उसके पूत। ऐसे अफसर संविधान, कानून और देश के प्रति निष्ठा वफादारी की बजाए सत्ता के लठैत बन कर आंख मूंद कर अपने आकाओं के इशारों पर नाचते हैं। सत्ताधारियों के संरक्षण के कारण ये आम जनता पर जुल्म तक करते हैं। मनचाहा पद पाने के लिए तो ये नेताओं की चरण वंदना तक कर सकते हैं। आम जनता पर जुल्म कर शेर बनने वाले अफसर नेताओं के सामने दुम हिलाते हैं। सच्चाई यह है कि अब समाज में दो ही जाति है ताकतवर और कमजोर की। नेता, जज,आईएएस,आईपीएस सब राजा या ब्राह्मण की श्रेणी में आते हैं बाकी सारी जनता शूद्र की श्रेणी में जीवन बिता रही है।
कमिश्नर में दम नहीं-
गृहमंत्री अमित शाह बगैर मॉस्क लगाए दिल्ली पुलिस मुख्यालय में गए। कमिश्नर सच्चिदानंद श्रीवास्तव ईमानदारी से कर्तव्य और कानून का पालन करने वाले होते तो वह गृहमंत्री का चालान करके मिसाल बना सकते थे। लेकिन सच्चाई यह है कि कमिश्नर और अन्य आईपीएस अफसर ही नहीं उनकी पत्नियां तक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। दूसरी ओर यह पुलिस अफसर नियमों का पालन कराने के नाम पर जनता के जम कर चालान कराते हैं।
मारपीट करने वाले अफसरों को सबक सिखाने का हक मिले-
लोगों को पीटने वाले निरंकुश कलेक्टर या पुलिस पर अंकुश लगाने का एक तरीका यह भी हो सकता है। सरकार द्वारा लोगों को यह अधिकार दिया जाए कि कानून हाथ में लेकर गुंडागर्दी करनेवाले अफसर के साथ लोग पलट कर वैसा ही करें जैसा गुंडों के साथ किया जाता। अभी तो हालात ऐसे हैं कि लोग आत्मरक्षा में पलट कर हाथ उठा देते तो उन्हें सरकारी अफसर पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाता। होना यह चाहिए कि जो भी अफसर ऐसी हरकत करता है और ल़ोग बचाव मेंं हाथ उठा देंं तो उसे सरकारी अफसर पर हमला नहीं माना जाना चाहिए। क्योंकि जो अफसर खुद कानून का पालन नहीं करता तो अपराध करने पर उसे सरकार द्वारा संरक्षण क्यों दिया जाए। इन अफसरों को इसी तरीक़े से सबक सिखाया जा सकता है। क्योंकि इनके खिलाफ शिकायत की जाए तो नौकरशाह और नेता मिल कर उसे बचा लेते हैं। अब इस मामले मेंं भी देख लो आईएएस एसोसिएशन ने इस कलेक्टर के खिलाफ एक शब्द तक नहीं बोला।
मैजिस्ट्रेट ने डॉक्टर को दी धमकी-
दिल्ली में महामारी के दौर में नौकरशाही कैसे काम कर रही है। इसका अंदाज यमुना विहार के पंचशील अस्पताल के डायरेक्टर वी के गोयल के डर से लगाया जा सकता है। डॉक्टर गोयल के मुताबिक उनके अस्पताल में कोरोना के 40 मरीज भर्ती हैं। अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले व्यक्ति ने 27 अप्रैल को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई। इस पर उन्होंने सरकार के नोडल अधिकारी समेत सभी से ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। डॉक्टर गोयल के मुताबिक तीन बजे उन्हें उत्तर पूर्वी जिले के एडीएम शुभांकर घोष ने नोटिस भेज दिया कि पांच बजे तक ऑक्सीजन का इंतजाम खुद कर लो। अगर इंतजाम नहीं किया तो आपदा प्रबंधन एक्ट आदि कानून के तहत आपके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस पर घबरा कर डॉक्टर ने वीडियो जारी कर यह सब उजागर कर दिया।
एडीएम का यह आदेश अगर कानूनी रुप से सही है तो ऐसे अन्य मामलों में डीएम/एडीएम बत्रा, जयपुर गोल्डन,गंगाराम और मैक्स आदि अस्पतालों के खिलाफ भी ऐसी कार्रवाई करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाते।
गुणैरुत्तमतां याति नोच्चैरासनसंस्थिताः । प्रासादशिखरस्थोऽपि काकः किं गरुडायते ॥
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने श्रेष्ठ गुणों और सच्चरित्र का महत्व स्वीकार किया है।
वे कहते हैं कि इन्हीं के कारण साधारण इंसान श्रेष्ठता के शिखर की ओर अग्रसर होता है जिस प्रकार महल की छत पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता है, उसी प्रकार ऊंचे आसन पर विराजमान व्यक्ति महान नहीं होता। महानता के लिए इंसान में सदुगणों एवं सच्चरित्र का होना जरूरी है। इससे वह नीच कुल में जन्म लेकर भी समाज में मान-सम्मान प्राप्त करता है।
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