नई दिल्ली: साहित्य अकादेमी की ओर से दिल्ली पुस्तक मेले के दौरान आदिवासी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मिलन की अध्यक्षता अरुणाचल प्रदेश से पधारे गालो आदिवासी समुदाय के कवि डॉ. टाकोप जिरडा ने किया।
आरंभ में औपचारिक स्वागत करते हुए अकादेमी के विशेष कार्याधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार देवेश ने अकादेमी द्वारा आदिवासी भाषा-साहित्य के लिए संचालित गतिविधियों का संक्षिप्त ब्यौरा दिया।
गुरुवार को आयोजित इस कवि सम्मेलन में गोंड, उरांव, हो और संताल आदिवासी समुदाय के चार कवियों- वसंत किशन कवड़े, जसिंता केरकेट्टा, बुधन सिंह हेस्सा और तुरिया चंद्र बास्के ने क्रमश: गोंडी, हिंदी, हो और संताली भाषा में अपनी कविताओं का पाठ किया। कवियों ने अपनी भाषा में कविता-पाठ के साथ कविताओं के हिंदी अनुवाद भी प्रस्तुत किए।
पठित कविताओं में आदिवासी समुदाय के प्रकृति से जुड़ाव के साथ-साथ आधुनिक सभ्यता की विसंगतियों का चित्रण किया गया था। आशा, आकांक्षा, सपना, प्रेम, प्रकृति, सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित कविताओं को श्रोताओं ने बेहद पसंद किया।
इसी कड़ी में अकादेमी द्वारा मेले में शुक्रवार को ‘युवा साहिती’ के अंतर्गत युवा लेखकों के बहुभाषी रचना-पाठ का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता हिंदी की प्रतिष्ठित लेखिका कमल कुमार ने किया।
–आईएएनएस

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