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एनडीएमसी अध्यक्ष ने ‘विकसित भारत के रंग’ कला कार्यशाला में 25 प्रख्यात कलाकारों को किया सम्मानित

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार द्विवेदी ने आज सरोजिनी नगर स्थित नवयुग स्कूल में ‘विकसित भारत के रंग’ विषय पर आयोजित कला कार्यशाला एवं रचनात्मक भित्ति चित्र पहल में भाग लेने वाले 25 प्रख्यात कलाकारों तथा 20 युवा कलाकारों को सम्मानित किया।

कलाकारों को उनके रचनात्मक योगदान के लिए सम्मानित करने के बाद एनडीएमसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने जीवन के लगभग हर क्षेत्र में अपनी प्रमुख भूमिका स्थापित की है और आने वाले तीन दशकों में भी इसका प्रभाव और अधिक बढ़ेगा। रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नए युग में यह आशंका है कि यदि कला और संस्कृति का विकास साथ-साथ नहीं हुआ, तो हमारे मानवीय गुण धीरे-धीरे कम होते जाएंगे और दुनिया रंगहीन हो जाएगी।

श्री द्विवेदी ने कहा कि एक समय था, जब हमारे जीवन की गति धीमी हुआ करती थी। हम ठहरकर चीजों को महसूस करते थे और प्रकृति, कला, संस्कृति, नृत्य, नाटक तथा संगीत के लिए समय निकालते थे। यही कारण है कि प्रत्येक महान सभ्यता में संगीत, कला और संस्कृति का उल्लेखनीय विकास हुआ है। लेकिन जैसे-जैसे जीवन की गति तेज होती गई, इन गतिविधियों के लिए समय कम होता गया। जीवन तनाव और दबाव से भर गया तथा हम यात्रा का आनंद लिए बिना केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की दौड़ में लग गए।

उन्होंने कहा कि मानव मस्तिष्क के दो पक्ष होते हैं—बायां और दायां मस्तिष्क। एक पक्ष कला, संस्कृति और विभिन्न प्रतिरूपों को समझने तथा उनकी सराहना करने में भूमिका निभाता है, जबकि दूसरा क्रमबद्ध प्रक्रिया और तार्किक कार्यों से जुड़ा होता है। जब हम दोनों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं, तो हमारा मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण बेहतर होता है, निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है और हम जीवन में सर्वांगीण सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों को यह भी समझना चाहिए कि जिनमें कला की प्रतिभा है, वे इसे अपने पेशे के रूप में आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं, जो बच्चे कला को अपना पेशा नहीं बनाना चाहते, उनकी सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे आयोजनों में भाग लेने से बहुत कुछ सीखने को मिलता है और आत्मचिंतन की भावना विकसित होती है, जो हमारे समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

एनडीएमसी अध्यक्ष ने विद्यार्थियों में कला और संस्कृति के प्रति इस प्रकार की रुचि तथा विशेष प्रतिभा देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी एनडीएमसी बजट में कला एवं संस्कृति के लिए आवंटित बजट बढ़ाया जाएगा, ताकि इस तरह की पहलों को शहर में और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली देश की राजधानी है, जहां विदेशों से प्रतिनिधि आते हैं और ठहरते हैं। इसलिए शहर की पहचान एक विश्वस्तरीय शहर के रूप में होनी चाहिए। हमारी कला और संस्कृति सड़कों पर भी दिखाई देनी चाहिए। प्रमुख स्थानों, विद्यालयों तथा उन सभी स्थानों पर भित्ति चित्र और पेंटिंग प्रदर्शित की जानी चाहिए, जहां सौंदर्यीकरण की आवश्यकता है। दृश्य कला के साथ-साथ संगीत और संस्कृति के अन्य पहलुओं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि इस उद्देश्य के लिए श्रेष्ठ कलाकारों को जोड़ा जाएगा तथा पूरे वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कला कैलेंडर तैयार किया जाएगा, जिसे योजनाबद्ध तरीके से अनुमोदित किया जाएगा।

अपने संबोधन के समापन में श्री द्विवेदी ने कहा कि जब हम यह समझ लेते हैं कि प्रत्येक यात्रा शून्य से शुरू होकर शून्य पर ही समाप्त होती है, तब हम अपने वास्तविक गंतव्य को पहचान पाते हैं। कला हमें इस यात्रा को और अधिक सार्थक बनाना सिखाती है।

‘विकसित भारत के रंग’ कला कार्यशाला एवं रचनात्मक भित्ति चित्र पहल में 10 से 17 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित सात दिवसीय कार्यक्रम के दौरान एनडीएमसी के 16 अटल आदर्श एवं नवयुग विद्यालयों के 500 से अधिक विद्यार्थियों, 50 कला शिक्षकों, 25 प्रतिष्ठित कलाकारों और 10वीं से 17वीं अक्टूबर तक आयोजित विभिन्न गतिविधियों में शामिल 20 युवा कलाकारों ने भाग लिया।

सात दिवसीय इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी कलात्मक प्रतिभा को निखारने तथा ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना से प्रेरित रचनात्मक भित्ति चित्रों के माध्यम से अपने विचारों और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।
इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों की दीवारों को जीवंत और आकर्षक कलात्मक कैनवास में परिवर्तित करना है, जो प्रभावशाली विचारों को अभिव्यक्त करें, भारत की विविधता का उत्सव मनाएं तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आकांक्षाओं से जोड़ें। प्रेरणादायक और आकर्षक शैक्षणिक वातावरण तैयार करके यह पहल विद्यार्थियों में जिज्ञासा विकसित करने, सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत बनाने, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ाने तथा उन्हें रचनात्मक, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखती है, जो भारत के भविष्य के निर्माण में योगदान देंगे।

कार्यशाला में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया, जिनमें विकसित भारत @2047 और भविष्य का भारत, भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं विविधता में एकता, भारतीय लोक परंपराएं और कहानी-कथन, प्रकृति, पर्यावरण एवं सतत विकास, विज्ञान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी, राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपराएं तथा विरासत, वास्तुकला और परंपरा से आधुनिकता तक की यात्रा प्रमुख हैं।

सात दिवसीय इस पहल के दौरान प्रख्यात एवं वरिष्ठ कलाकारों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और उनके विचारों को जीवंत कलात्मक अभिव्यक्तियों में बदलने में सहायता की। इस कार्यशाला का उद्देश्य युवा मन में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना तथा कला को एक प्रगतिशील और विकसित भारत की आकांक्षाओं को व्यक्त करने के माध्यम के रूप में विकसित करना था।

इस कार्यक्रम ने कल्पनाशीलता, कलात्मक कौशल और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने वाली रचनात्मक गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी के महत्व को भी रेखांकित किया। विद्यार्थियों और कलाकारों को एक साझा मंच पर लाकर इस पहल ने कला के माध्यम से विभिन्न पीढ़ियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया।

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