नई दिल्ली, 28 अक्टूबर, 2026.सतर्कता जागरूकता सप्ताह के आयोजन के अवसर पर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार द्विवेदी ने आज पालिका केंद्र स्थित एनडीएमसी मुख्यालय में विभागाध्यक्षों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्य सतर्कता अधिकारी सुश्री आस्था लक्ष्मी, एनडीएमसी के सचिव श्री राहुल सिंह तथा वित्तीय सलाहकार श्री राकेश कुमार भी उपस्थित थे। इस शपथ का उद्देश्य भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करना तथा कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि भ्रष्टाचार केवल मौद्रिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लापरवाही, कर्तव्य के निर्वहन में कोताही तथा उचित व्यवस्थाएं और अनुशासन स्थापित करने में विफलता के रूप में भी सामने आ सकता है।
उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार का एक ऐसा रूप भी है, जिसमें नकदी का कोई लेन-देन नहीं होता। यदि आप अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करते, अपने कार्य के किसी महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी करते हैं अथवा जहां व्यवस्था और अनुशासन स्थापित किए जा सकते थे, वहां ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो यह भी भ्रष्टाचार के समान है।”
भ्रष्टाचार से उत्पन्न दो प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित करते हुए श्री द्विवेदी ने कहा, “भ्रष्टाचार का एक रूप वह है, जिसमें नागरिकों को अपना काम करवाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए हम अपनी सेवाओं को ऑनलाइन और फेसलेस बना रहे हैं, ताकि लोगों को अपना काम करवाने के लिए किसी व्यक्ति के पास जाने या उससे संपर्क करने की आवश्यकता न पड़े। दूसरा रूप वह है, जिसमें लोग व्यवस्था को धोखा देने के लिए आपस में मिलीभगत करते हैं। मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार के ये दोनों रूप एक बड़ी चुनौती हैं।”
श्री द्विवेदी ने शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने तथा भ्रष्टाचार और कदाचार की शिकायत दर्ज कराने के संबंध में जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि टेलीफोन नंबर और ईमेल आईडी सहित संपर्क विवरण व्यापक रूप से उपलब्ध कराए जाएं तथा एक समर्पित सतर्कता ऐप शुरू करने की संभावना पर भी विचार किया जाए। इस प्रकार की व्यवस्था से नागरिक उन मामलों की शिकायत कर सकेंगे, जिनमें उनसे रिश्वत मांगी जाती है, उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है अथवा उन्हें उत्पीड़न का शिकार बनाया जाता है।
एनडीएमसी 26 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2026 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह मना रही है। इसका उद्देश्य शासन, लोक प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा, ईमानदारी तथा नैतिक आचरण के महत्व को रेखांकित करना है। इस वर्ष सतर्कता जागरूकता सप्ताह का विषय “समृद्धि के लिए सत्यनिष्ठा” (Probity for Prosperity) है।
इस आयोजन के अंतर्गत एनडीएमसी द्वारा पूरे सप्ताह कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और नैतिक आचरण के महत्व पर एनडीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निबंध लेखन और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देने के लिए एनडीएमसी द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए जागरूकता सत्रों की एक श्रृंखला भी आयोजित की जा रही है, जिनका विवरण निम्नलिखित है:
सार्वजनिक खरीद एवं अनुबंध प्रबंधन में सत्यनिष्ठा:
अधिकारियों को सार्वजनिक खरीद और अनुबंध प्रबंधन में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा जवाबदेही बनाए रखने के प्रति जागरूक किया गया। भ्रष्टाचार की किसी भी संभावना को रोकने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट, निविदा की स्पष्ट शर्तों तथा सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) का कड़ाई से पालन करने पर विशेष जोर दिया गया।
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के नए परिपत्र एवं सीवीसी सतर्कता नियमावली, 2026:
केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों तथा अद्यतन सीवीसी सतर्कता नियमावली, 2026 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को शिकायतों के निपटान की प्रक्रियाओं, जांच की समय-सीमाओं तथा निवारक सतर्कता की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।
निवारक सतर्कता:
इस सत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि दंडात्मक सतर्कता की तुलना में निवारक सतर्कता अधिक प्रभावी होती है। अधिकारियों से आग्रह किया गया कि वे भ्रष्टाचार की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करें, प्रक्रियाओं को सरल बनाएं, प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करें तथा विवेकाधीन निर्णयों और मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करने के लिए उचित व्यवस्थाएं एवं चेकलिस्ट लागू करें।
व्यक्तिगत वित्त का प्रबंधन:
व्यक्तिगत वित्त के विवेकपूर्ण प्रबंधन, नैतिक आचरण तथा ऐसी वित्तीय परिस्थितियों से बचने के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिनसे व्यक्ति की आर्थिक असुरक्षा बढ़ सकती है और निर्णय लेने की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
इन सत्रों का उद्देश्य ईमानदारी की संस्कृति को मजबूत करना, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता का विकास करना तथा स्वच्छ, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन सुनिश्चित करना है।

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